लाल रंग देखकर सांड को क्यों आता है गुस्सा

लाल रंग देखकर सांड को क्यों आता है गुस्सा

क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों एक सांड लाल रंग को देखकर अपना आपा खो बैठता है आखिर ऐसी कौन सी वजह है जिस के कारण सांड लाल रंग से इतना चिडता है।

दरअसल इन्सान की आंख में मौजूद रेटिना में तीन तरह की शंकु कोशिकाएं यानी कि cone cells  पाई जाती हैं जो कि लाल, हरा और नीला रंग देखने में मदद करती हैं यह तीनों cone cells ही  मिल जुल  कर हमें अलग-अलग रंगों का अनुभव कराती हैं।

आप सभी को यह जानकर आश्चर्य होगा कि मवेशी लाल रंग देखी नहीं सकते।

वैज्ञानिकों की मानें तो सांड  Dichromatic होते हैं। इसका मतलब है कि उनके पास सिर्फ दो तरह की cone cells होती हैं जो सिर्फ हरा, नीला या फिर इन से मिलजुल कर बनने वाले रंग देखने में सक्षम होती हैं। आप सभी लोग स्पेन के विश्व प्रसिद्ध खेल बुल फाइट के बारे में तो जानते ही होंगे जिसमें लाल रंग का कपड़ा हिलाते हुए एक आदमी सांड को गुस्सा दिलाता है और फिर उसे मार कर जीत का जश्न मनाता है। दरअसल सांड लाल रंग को नहीं बल्कि उस हिलते हुए कपड़े के पीछे दौड़ता है जो कि उसे हिलता हुआ बिल्कुल अच्छा नहीं लगता, इसलिए यह कहना कि लाल रंग को देखकर सांड किसी के पीछे पढ़ने लगता है यह एक अफवाह है दरअसल सांड लाल रंग को देख ही नहीं सकता है ऐसे ही कई जानवर है जो लाल रंग नहीं देख पाते हैं।

 

बात करे अगर आपके pet कुत्तों की

कुत्तों को कलर ब्लाइंड माना जाता है क्योंकि वे कुछ रंग नहीं देख सकते हैं। इन रंगों में लाल, नारंगी और हरा शामिल है। कुत्ते उन रंगों के बीच केवल अंतर बता सकते हैं, एक कुत्ता केवल पीले, नीले और बैंगनी रंग देख सकता है।

वहीं  बिल्लियाँ नीले और हरे रंग में अंतर कर सकती हैं लेकिन लाल रंग नहीं देख सकतीं।

 

जबकी उल्लू एक मात्र ऐसा पक्षी है जिसे पूरी दुनिया काली और सफ़ेद दिखाई देती है उसके बावजूद भी उल्लू रात में इंसानों से ज्यादा देख सकता है।

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