आईएएस कैडर नियमों में बदलाव से शक्तियों के दुरूपयोग की आशंका

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नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर नियमों में प्रस्तावित बदलाव केंद्र द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग की व्यापक गुंजाइश बनाएगा। साथ ही, जब कभी राज्य सरकारों से केंद्र नाखुश होगा, वह अहम पदों पर आसीन अधिकारियों को निशाना बना सकता है। 27 जनवरी को 109 से अधिक पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस बारे में काफी प्रमाण है कि प्रस्तावित संशोधन पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया है और पर्याप्त संघीय परामर्श के बगैर एक ऐसे तरीके से इसके लिए जल्दबाजी की जा रही है जो मौजूदा शासन द्वारा केंद्रीकृत शक्ति के मनमाने इस्तेमाल के प्रति झुकाव को प्रदर्शित करता है। पूर्व सिविल सेवकों ने केंद्र से इस प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ने को कहा है। उन्होंने इसे मनमाना, अतार्किक और असंवैधानिक करार देते हुए इसे संविधान के मूल ढांचे में हस्तक्षेप तथा अपूरणनीय नुकसान पहुंचा सकने वाला बताया है।

उन्होंने कहा कि देश के संघीय ढांचे में केंद्र और राज्य अलग-अलग इकाई हैं, हालांकि वे समान संवैधानिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तालमेल के साथ काम करते हैं। बयान में कहा गया है, तीनों अखिल भारतीय सेवाओं के कैडर नियमों में प्रस्तावित बदलाव केंद्र को राज्यों में कार्यरत एआईएस अधिकारियों को राज्य में उनकी सेवाओं से हटाने और केंद्र में बुलाने की एकपक्षीय शक्तियां देता है। यह संबद्ध अधिकारी या राज्य सरकार की सहमति के बगैर किया जाएगा।

बयान पर हस्ताक्षर करने वाले 109 पूर्व अधिकारियों में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नजीब जंग, पूर्व विदेश सचिव एवं पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई और पूर्व रक्षा सचिव अजय विक्रम सिंह शामिल हैं।

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