उभरते भारत की सोच व एप्रोच नई, फैसले प्रगतिशील : मोदी

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जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि लोग ऐसे भारत को उभरते हुए देख रहे हैं जिसकी सोच व एप्रोच (दृष्टिकोण) नई है और जिसके निर्णय प्रगतिशील हैं। मोदी ने कहा कि सरकार समानता व सामाजिक न्याय आधारित समाज बना रही है जिसमें भेदभाव की कोई जगह न हो। इसके साथ ही मोदी ने आगामी 25 साल को देश लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, यह कालखंड सैकड़ों वर्ष की गुलामी में हमारे समाज ने जो गंवाया उसे दोबारा प्राप्त करने का है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि खराब करने की प्रवृत्ति पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा, हमारा दायित्व है कि दुनिया भारत को सही रूप में जाने।

प्रधानमंत्री मोदी माउंट आबू स्थित ब्रह्मकुुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित आजादी के अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर कार्यक्रम के शुरुआत समारोह को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव समारोहों के क्रम में ब्रह्मकुमारीज संस्था का यह कार्यक्रम स्वर्णिम भारत की भावना, प्रेरणा और साधना का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ निजी आकांक्षाएं और सफलताएं हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय आकांक्षाएं और सफलताएं हैं, जिनके बीच कोई अंतर नहीं है। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, राष्ट्र की प्रगति ही हमारी प्रगति है। हमसे ही राष्ट्र का अस्तित्व है, और राष्ट्र से ही हमारा अस्तित्व है। यह भाव, यह बोध ही नए भारत के निर्माण में हम भारतवासियों की सबसे बड़ी ताकत बन रहा है। आज देश में जो कुछ हो रहा है, उसमें सबका प्रयास शामिल है।

उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास देश का दिग्दर्शक मूलमंत्र बन रहा है। नए भारत की नवोन्मेषी और प्रगतिशील नई सोच और नई दृष्टि का उल्लेख करते उन्होंने कहा, आज हम एक ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं, जिसमें भेदभाव की कोई जगह न हो, हम एक ऐसा समाज बना रहे हैं, जो समानता और सामाजिक न्याय की बुनियाद पर मजबूती से खड़ा हो।

प्रधानमंत्री ने उपासना की भारतीय परंपरा और महिलाओं के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, दुनिया जब अंधकार के गहरे दौर में थी, महिलाओं को लेकर पुरानी सोच में जकड़ी थी, तब भारत मातृशक्ति की पूजा, देवी के रूप में करता था। हमारे यहां गार्गी, मैत्रेई, अनुसूया, अरुंधति और मदालसा जैसी विदुषियां समाज को ज्ञान देती थीं।

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