एमएसएमई, संपर्क-सघन क्षेत्रों के लिए आरबीआई के उपाय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत: विशेषज्ञ

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नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के बीच रेपो दर को अपरिवर्तित रखने के भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के  निर्णय पर वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय अर्थव्यवस्था में वृद्धि का समर्थन करने में रिज़र्व बैंक की प्राथमिकता को दर्शाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), संपर्क-बहुल क्षेत्रों और डिजिटल लेनदेन के लिए किए गए अतिरिक्त उपाय समग्र आर्थिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे संकेत हैं। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार 10वीं बार रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है और रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत पर यथावत रखा है। मुथूट फाइनेंस के प्रबंध निदेशक जॉर्ज अलेक्जेंडर मुथूट ने कहा, हम वर्ष 2022 में व्यापक रूप से आधारित आर्थिक पुनरुद्धार के बारे में आशान्वित और आशावादी हैं। उन्होंने कहा, आरबीआई और सरकार महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बाद टिकाऊ आधार पर वृद्धि को पुनर्जीवित करने और बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। हम एमएसएमई के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे को सक्षम करने के आरबीआई के रुख का स्वागत करते हैं। आईआईएफएल सिक्योरिटीज (खुदरा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी संदीप भारद्वाज ने कहा कि उदार मौद्रिक रुख जारी रखने का मतलब है कि आरबीआई और सरकार अभी भी आर्थिक सुधार को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

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