एयर इंडिया के साथ सरकारी कंपनियों के निजीकरण का दौर शुरू

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नई दिल्ली। एयर इंडिया को टाटा समूह को सौंपने के साथ देश में लगभग दो दशकों के बाद कर्ज में डूबी सरकारी कंपनियों के निजीकरण का कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया है। सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में टाटा समूह के साथ 18,000 करोड़ रुपए में राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया की बिक्री के लिए शेयर खरीद समझौता किया था। सरकार ने 1999 से 2003-04 के दौरान 10 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) का निजीकरण करके लगभग 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की थी।

सरकार ने वर्ष 2001-02 में वीएसएनएल, कंप्यूटरों का रखरखाव करने वाली कंपनी सीएमसी, हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर्स लिमिटेड (एचटीएल), पारादीप फॉस्फेट लिमिटेड (पीपीएल), एचसीआई और आईटीडीसी की कुछ होटल संपत्तियों को बेचकर 2,089 करोड़ रुपए जुटाए। इसके बाद वर्ष 2002-03 के दौरान हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल), इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पाेरेशन (आईपीसीएल), आईटीडीसी की कुछ होटल संपत्तियों को बेचकर 2,335 करोड़ रुपए जुटाए गए। वही वर्ष 2003-04 में एचजेडएल (दूसरी शाखा), जेसप एंड कंपनी का 342 करोड़ रुपए में निजीकरण किया गया।

इंडो बर्मा पेट्रोलियम कंपनी (आईबीपी) में 74 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी को 2001-02 में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) को।,153 करोड़ रुपए में बेचा गया।

वर्ष 2018 के दौरान तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) में हिस्सेदारी 36,915 करोड़ रुपए में खरीदी।

वर्ष 2018-19 में आरईसी में सरकार की 52.63 फीसदी हिस्सेदारी पावर फाइनेंस कॉर्प को 14,500 करोड़ रुपए में बेची गई।

सरकार ने 2000-01 और 2019-20 के बीच नौ सीपीएसई में अपनी पूरी हिस्सेदारी अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कुल 53,450 करोड़ रुपए में बेची।

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