बदलाव के दौर में 78 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों ने कहा, कॉरपोरेट निष्ठा निभाना मुश्किल

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नई दिल्ली। भारत के 78 प्रतिशत पेशेवरों का मानना है कि कॉरपोरेट निष्ठा को बनाए रखना यहां पर मुश्किल है जबकि उभरते बाजारों में ऐसी राय रखने वाले पेशेवरों का अनुपात 60 प्रतिशत है। ईवाई की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पेशेवर सलाहकार फर्म ईवाई ने मंगलवार को जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा कि भारतीय बाजार में तीव्र गति से बदलाव होने की वजह से यहां पर कॉरपोरेट निष्ठा को बनाए रखना मुश्किल होता है। उतार-चढ़ाव से भरे बाजार परिदृश्य में कंपनियों के कमजोर बने रहने से यह समस्या बढ़ जाती है।
ईवाई ने यह रिपोर्ट भारत के 100 पेशेवरों से मिली सूचनाओं के आधार पर तैयार किया है। इस सर्वे में 34 उभरते बाजारों से संबंधित 2,750 बोर्ड सदस्यों, प्रबंधकों एवं कर्मचारियों ने भी हिस्सा लिया। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सक्रिय कंपनियों को सर्वे में शामिल अन्य बाजारों के नियामकों की तुलना में कहीं अधिक नियामकीय कार्वाई का सामना करना पड़ता है। उभरते बाजारों में नियामकीय कार्वाई का सामना करने वाली कंपनियों की संख्या 38 प्रतिशत पाई गई है जबकि भारत में यह अनुपात 60 प्रतिशत तक रहा है। इसी के साथ भारतीय कंपनियों के 65 प्रतिशत पेशेवरों ने कहा है कि नियामकीय प्रावधानों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने में समस्या होती है जबकि उभरते बाजारों के मामले में ऐसी राय 45 प्रतिशत प्रतिभागियों की रही। ईवाई- भारत एवं वैश्विक बाजार के फॉरेंसिक एवं इंटेग्रिटी सेवा प्रमुख अरपिंदर सिंह का इस रिपोर्ट के निष्कर्षों के बारे में मानना है कि बड़ी कंपनियों के साथ स्टार्टअप फर्मों के मामले में भी एक ही तरह की समस्या देखने को मिली है।

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