देवास को विदेशों में संपत्तियां जब्त करने से रोकेंगे : सीतारमण

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस की अगुआई वाली पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर वर्ष 2005 के देवास-एंट्रिक्स सौदे में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए 18 जनवरी को कहा कि सरकार देवास मल्टीमीडिया के परिसमापन को सही ठहराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के आधार पर विदेशों में अपनी परिसंपत्तियों की जब्ती को चुनौती देगी।

कांग्रेस पर धोखाधड़ी

सीतारमण ने एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के खिलाफ कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आरक्षित एस-बैंक स्पेक्ट्रम देवास मल्टीमीडिया को देकर देश के लोगों के साथ धोखाधड़ी की थी। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के 17 जनवरी को आए फैसले के कुछ अंश उद्धृत करते हुए कहा, यह कांग्रेस का कांग्रेस के लिए और कांग्रेस द्वारा किया गया फरेब है। इस फैसले में देवास मल्टीमीडिया के परिसमापन के आदेश को इस आधार पर बरकरार रखा गया है कि इसे धोखाधड़ी से अंजाम दिया गया था।

क्या था मामला

संप्रग सरकार के दौरान वर्ष 2005 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स और देवास के बीच स्पेक्ट्रम उपयोग को लेकर करार हुआ था। इसके जरिये मोबाइल फोनधारकों को मल्टीमीडिया सेवाएं मुहैया कराई जानी थी।

सीतारमण ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की जानकारी के बगैर ही एंट्रिक्स को इस सौदे के तहत एस-बैंड के स्पेक्ट्रम देने पर हामी भरी गई थी। विवाद बढ़ने पर संप्रग सरकार ने छह साल बाद इस सौदे को निरस्त किया लेकिन देवास की तरफ से शुरू की गई मध्यस्थता कार्यवाही से निपटने की कोशिश नहीं की। यह सौदा 2011 में इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम की नीलामी धोखाधड़ी में हुई थी और सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य सामाजिक उद्देश्यों के लिए एस-बैंड उपग्रह स्पेक्ट्रम की जरूरत थी।

इसके बाद देवास मल्टीमीडिया ने इंटरनेशनल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) में फैसले के खिलाफ मध्यस्थता कार्रवाई शुरू की। इसके अलावा देवास के निवेशकों द्वारा दो अन्य मध्यस्थता कार्रवाई भी शुरू की गईं।

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