नोडल अधिकारी के संरक्षण में जनपद बिजनौर में चल रहे कई नर्सिंग होम

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जनपद बिजनौर में तैनात नोडल अधिकारी पहले से ही काफी चर्चाओं में हैं और अब नोडल अधिकारी किसी की परवाह नहीं करते क्योंकि उनके ऊपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की बड़ी मेहरबानी है। हाल ही में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो गए हैं। इसका मतलब साफ है कि हमारे मुख्य चिकित्सा अधिकारी की छवि और कार्यशैली कैसी है और सोने पर सुहागा नोडल अधिकारी एस0के0 निगम जो झोलाछाप डॉक्टरों के यहां से करोड़ों की उगाही कर रहे हैं, जिले में हर गली मोहल्ले में झोलाछाप उन लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं किंतु दोनों अधिकारियों को इससे कुछ लेना देना नहीं है। दोनों ही अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और उच्च अधिकारियों में अपनी सांठगांठ कर बेरोकटोक कमाई कर रहे हैं। इसमें प्रमाण की आवश्यकता नहीं हैजब भी जांच हो गली मोहल्लों में गांव देहात में न जाने कितने झोलाछाप लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर चुके हैं और कर रहे हैं। नोडल अधिकारी पद को लेकर पहले से ही अन्य डॉक्टरों  एसके निगम को लेकर कई बार तलवारे कि चुकी हैं और इससे पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हर तहसील स्तर पर 11 नोडल अधिकारी नियुक्त किया था। पैसों की भूख  ने एकराय कर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ठेंगा दिखा दिया उसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से सब को हटा कर डॉ एसके निगम को नोडल अधिकारी बना दिया। अब विभाग में जो भी झोलाछाप चढ़ावा चढ़ाने के लिए आता है तो नोडल अधिकारी अपने राजकुमार बाबू के पास भेज देते हैं जो धन उगाई में माहिर हैं। जितने भी झोलाछाप से लेने होता है या किसी अन्य डॉक्टर से लेनदेन होता है वह राजकुमार बाबू और स्वयंभू के माध्यम से ही होता है। प्रमाण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि सालों से दोनों ही बाबू और अधिकारी बिजनौर में इसी पद पर जमे हुए हैं और डंके की चोट पर काम कर रहे हैं।

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