मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात और युवाओं की जीविका पर प्रहार 

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नई दिल्ली। विपक्ष ने 01 फरवरी को संसद में पेश 2022-23 के आम बजट के लिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने देश के वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग को राहत नहीं देकर उनके साथ विश्वासघात और युवाओं की जीविका पर आपराधिक प्रहार किया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, मोदी सरकार के बजट में कुछ नहीं है। मध्यम वर्ग, वेतनभोगी वर्ग, गरीब और वंचित वर्ग, युवाओं, किसानों और एमएसएमई के लिए कुछ नहीं है।

 

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने आरोप लगाया, सरकार के वादे एक के एक बाद झूठ साबित होते जा रहे हैं। राजकोषीय घाटा बहुत ही ज्यादा है… कॉरपोरेट कर घटाया (गया बजट में)। आम लोगों को राहत नहीं दी। वित्त मंत्री जी ने बजट भाषण के दौरान महाभारत का उल्लेख किया। मैं तो यही कहूंगा कि यह द्रोणाचार्य और अर्जुन का बजट है, एकलव्य का बजट नहीं है।

 

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, भारत का वेतनभोगी वर्ग एवं मध्यम वर्ग महामारी, वेतन में चौतरफा कटौती और कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में राहत की उम्मीद कर रहा था। वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से अपने प्रत्यक्ष कर से संबंधित कदमों से इन वर्गों को बहुत निराश किया है।

 

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, बजट किसके लिए है? सबसे अमीर 10 प्रतिशत भारतीय देश की कुल संपत्ति के 75 प्रतिशत के स्वामी हैं। नीचे के 60 प्रतिशत लोग सिर्फ पांच प्रतिशत संपत्ति के मालिक हैं। महामारी के दौरान सबसे अधिक मुनाफा कमाने वालों पर अधिक कर क्यों नहीं लगाया गया?

 

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, बेरोजगारी और महंगाई से पिस रहे आम लोगों के लिए बजट में कुछ नहीं है। बड़ी-बड़ी बाते हैं और हकीकत में कुछ नहीं है। पेगासस स्पिन बजट है।

 

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, करोना काल में लोगों को बजट से बहुत उम्मीद थी। बजट ने लोगों को मायूस किया। आम जनता के लिए बजट में कुछ नहीं है। महंगाई कम करने के लिए कुछ नहीं।

 

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने ट्वीट किया, संसद में आज पेश केन्द्रीय बजट नए वादों के साथ जनता को लुभाने के लिए लाया गया है, जबकि गत वर्षों के वादों व पुरानी घोषणाओं आदि के अमल को भुला दिया गया है, यह कितना उचित। केंद्र बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई व किसानों की आत्महत्या जैसी गंभीर चिन्ताओं से मुक्त क्यों?

 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता अतुल कुमार अनजान ने आरोप लगाया कि इस बजट में ग्रामीण भारत और आम लोगों को कोई राहत नहीं दी गई है।

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