वर्चुअल सुनवाई के लिए मोबाइल फोन के उपयोग पर नहीं है रोक : न्यायालय

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के महासचिव ने 19 जनवरी को कहा कि वकीलों और वादियों को वर्चुअल अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करने से दूर रहने का निर्देश देने वाला नोटिस महज परामर्शदात्री है और यह इस उपकरण के उपयोग पर रोक नहीं लगाता है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमण को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकार्ड एसोसिएशन (एससीओआरए) के एक प्रतिवेदन पर शीर्ष न्यायालय के महासचिव वीरेंद्र कुमार बंसल का यह स्पष्टीकरण आया है। प्रतिवेदन में प्रधान न्यायाधीश से न्यायालय की रजिस्ट्री को यह कहने का अनुरोध किया गया है कि वह अदालती सुनवाई में शामिल होने के लिए एक खास तरह के उपकरण या कनेक्टिविटी (संपर्क प्रणाली) पर जोर नहीं दे।

उल्लेखनीय है कि 17 जनवरी को सीजेआई ने मोबाइल फोन के उपयोग के चलते वर्चुअल सुनवाई के दौरान व्यवधान पड़ने को लेकर नाखुशी जाहिर की थी। उस दिन, बाद में न्यायालय की रजिस्ट्री ने एक परिपत्र के जरिए वकीलों और वादियों को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संचालित की जाने वाली अदालती कार्यवाहियों में शामिल होने के लिए एक स्थिर इंटरनेट कनेक्शन के साथ डेस्कटॉप या लैपटॉप का उपयोग करने को कहा था।

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