शराब की दुकान से कोरोनावायरस खरीद कर घर ले जा रहे हैं लोग प्रशासन गदगद

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जनपद बिजनौर में जिस तरह से आबकारी विभाग ने मौत की दुकान खुलवा दी है उसे देखकर लगता है कि सरकार नहीं चाहती की कोरोना वायरस खत्म हो। लोग लंबी लंबी कतारों में खड़े होकर एक दूसरे से चिपक कर शराब की बोतलों खरीद कर कोरोनावायरस फैला रहे हैं। पहले जनता का एक सवाल है की सरकार ने लॉकडाउन किसके लिए लगाया, जब शराब जैसी दुकान खोलनी ही थी तो लॉकडाउन लगाने की क्या आवश्यकता थी क्योंकि शराब प्रेमी अपने घरों से निकलकर बेवजह शराब नहीं खरीद रहे बल्कि अपने आनंद के लिए शराब की दुकानों पर लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होकर शराब खरीद रहे हैं।
 उनको मालूम नहीं कि वह शराब नहीं कोरोना जैसी भयानक बीमारी खरीद कर अपने घर ले जा रहे हैं। शराब ऐसी चीज नहीं है कि आदमी इसके बिना मर जाए। शराब कोई दवाई नहीं है जिससे कोरोना संक्रमण भाग जाए। लेकिन आखिरकार एक तरफ लॉकडाउन और दूसरी तरफ शराब की दुकानों को खोलने का आदेश आखिरकार खोलने और बंद करने का आदेश किसने दिया क्या सोच कर दिया। यह कहना बड़ा मुश्किल है लेकिन यह कहना अति आवश्यक है कि जिस तरह से शराब की दुकानों पर लंबी लंबी लाइनें लगी है ना तो लॉक डाउन का पालन होगा और ना ही कोरोना संक्रमण से बचाव। इसके पीछे अधिकारियों की क्या मंशा है इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिरकार लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही रोटी नहीं मिल रही और कारोबार नहीं मिल रहे लेकिन शराब जरूर मिल रही है, या यूं कहें अधिकारियों द्वारा शराब की दुकानों पर मौत मिल रही है। जिस चीज की आवश्यकता थी आज लोगों से वंचित हैं लेकिन शराब जैसी हर तरह से मौत की आवश्यकता नहीं थी लेकिन अधिकारी उसे खुली भी को आ रहे हैं। अब आप इसी से समझ ले की अधिकारी आखिरकार चाह क्या रहे हैं यदि लोग शराब लेने के लिए घर से नहीं निकलेंगे तो बिक्री कैसे होगी और बिक्री हुई तो कोरोना फिर आपके साथ घर जाएगा। अधिकारी भले ही शराब की दुकानों को खुलवा कर खुश हो लेकिन आमजन अब उंगली उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

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