स्कूलों को फिर से खोलना भर पर्याप्त नहीं, बच्चों को प्रणाली में समेकित करना होगा

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नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी के अनुसार स्कूलों के बंद होने से पढ़ाई को हुआ नुकसान कोविड-19 से दीर्घकाल में उबरने में एक सबसे बड़ा वैश्विक खतरा है और यदि तत्काल सुधारात्मक कार्य नहीं किए गए तो गंभीर आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी। अस्थाई रूप से स्कूलों के बंद रहने से स्थाई नुकसान होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महज स्कूलों को फिर से खोल देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पढ़ाई को हुए नुकसान का आकलन नहीं करना और बच्चों को प्रणाली में वापस समेकित करने के लिए कदम नहीं उठाना त्रासदी को बढ़ाएगा। प्रख्यात अर्थशास्त्री बनर्जी, ग्लोबल एजुकेशन एविडेंस एडवाइजरी पैनल के सह-अध्यक्ष हैं। यह महामारी बाद की दुनिया में शिक्षा क्षेत्र के लिए सिफारिशें करने पर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, बच्चों की शिक्षा,कल्याण और भविष्य पर कोविड-19 संकट के लघु अवधि में एवं दीर्घकालीन प्रभाव गहरे हैं। विश्व के ज्यादातर देशों में स्कूलों को बंद हुए करीब दो साल हो गए हैं, सरकारों को इससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। आकलन से पता चलता है कि यदि सुधारात्मक कदम तत्काल नहीं उठाए जाते हैं तो कोविड संकट से पढ़ाई को हुए नुकसान की आर्थिक कीमत खरबों डॉलर में होगी।

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