कोरोना पर नीति आयोग की बड़ी चेतावनी, कहा- रोजाना आएंगे 14 लाख मामले, नहीं होगी….

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डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के बाद इसका सबसे ज्यादा असर ब्रिटेन में हो रहा है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने चिंता जताते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि, अगर सावधानी नहीं बरते तो फिर नियंत्रण मुश्किल होगा। ब्रिटेन में संक्रमण के आंकड़े देखे जाए और उसकी तुलना अपने देश की आबादी से करें तो, हमारे यहां रोजाना 14 लाख मामले सामने आएंगे। इतना ही नहीं हम सभी केस की जीनोम सीक्वेंसिग भी नहीं कर पाएंगे।  

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जीनोम सीक्वेंसिंग में भारत आगे
डॉ. पॉल के अनुसार, भारत जीनोम सीक्वेंसिंग करने के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर है और इसे लगातार ज्यादा से ज्यादा करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, आने वाले समय में अगर केसेस ज्यादा होते है तो, हर मरीज की जीनोम सीक्वेंसिंग करना संभव नहीं होगा। फिलहाल पर्याप्त और सिस्टेमैटिक सैंपलिंग की जा रही है।

क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग ?

  • जीनोम सीक्वेंसिंग को आसान भाषा में समझा जाए तो, ये किसी भी वायरस का बायोडेटा बताता है।
  • मतलब- कोई वायरस कैसा है, कैसे दिखता है। इन सब बातों की जानकारी जीनोम सीक्वेंसिंग में मिलती है।
  • वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहते है। 
  • वहीं जब हम वायरस की विधि को जानने की कोशिश करते है तो, इसे जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं।
  • जीनोम सीक्वेंसिंग से कोरोना के नए स्ट्रेन का पता चलता है।

देश के किन राज्यों में है जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा

  • इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी – नई दिल्ली
  • डीबीटी – इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज – भुवनेश्वर
  • सीएसआईआर-आर्कियोलॉजी फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी – हैदराबाद
  • डीबीटी-इन स्टेम-एनसीबीएस – बेंगलुरु
  • डीबीटी-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स- पश्चिम बंगाल
  • आईसीएमआर- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी- पुणे 

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